कितने आयें।
मीठे सपने,
प्यार की बातें,
कितने सारे
वादे लायें।
लेकिन जो भी
बाँधने आयें,
सबकुछ लाये,
प्रेम-सना वह
डोर न लाए,
जिससे मेरी
रूह बंध जाये।
पागल मन तो
ढूँढ रहा है,
ऐसा कोई
बाँधने वाला,
जो बंधन को
मुक्ति बनाये।
© तनया ताशा
हम दोनों की चाहत में,
बस इतनी - सी बात है;
हम एक समय में ज़िन्दा हैं,
बस इतना - ही साथ है,
और इतनी - सी बात है।
© तनया
© तनया ताशा